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श्री गणपति विसर्जन


भगवान् श्री गणपति की ११ दिनों की पूजा अर्चना के पश्चात उनकी विदाई तथा विसर्जन निम्नानुसार विधि से करें  

विशेष प्रसाद (लडडू या मोदक) का भोग लगाएं।

अब श्री गणेश के पवित्र मंत्रों से उनका स्वस्तिवाचन करें।

*  एक स्वच्छ पाटा लें। उसे गंगाजल या गौमूत्र से पवित्र करें। घर की स्त्री उस पर स्वास्तिक बनाएं। उस पर अक्षत रखें। इस पर एक पीलागुलाबी या लाल सुसज्जित वस्त्र बिछाएं।

इस पर गुलाब की पंखुरियां बिखेरें। साथ में पाटे के चारों कोनों पर चार सुपारी रखें।
अब श्री गणेश को उनके जयघोष के साथ स्थापना वाले स्थान से उठाएं और इस पाटे पर विराजित करें। पाटे पर विराजित करने के उपरांत उनके साथ फलफूलवस्त्रदक्षिणा, 5 मोदक रखें।

एक छोटी लकड़ी लें। उस पर चावलगेहूं और पंच मेवा की पोटली बनाकर बांधें। यथाशक्ति दक्षिणा (‍सिक्के) रखें। मान्यता है कि मार्ग में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसलिए जैसे पुराने समय में घर से निकलते समय जो भी यात्रा के लिए तैयारी की जाती थी वैसी श्री गणेश के बिदा के समय की जानी चाहिए।

नदीतालाब या पोखर के किनारे विसर्जन से पूर्व कपूर की आरती पुन: संपन्न करें। श्री गणेश से खुशी-खुशी बिदाई की कामना करें और उनसे धनसुखशांतिसमृद्धि के साथ मनचाहे आशीर्वाद मांगे। 11 दिन जाने-अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थना भी करें।

श्री गणेश प्रतिमा को फेंकें नहीं उन्हें पूरे आदर और सम्मान के साथ वस्त्र और समस्त सामग्री के साथ धीरे-धीरे बहाएं।

श्री गणेश इको फ्रेंडली हैं तो पुण्य अधिक मिलेगा क्योंकि वे पूरी तरह से पानी में गलकर विलीन हो जाएंगे। आधे अधूरे और टूट-फूट के साथ रूकेगें नहीं।

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